रोजाना मेल (न्यूज डेस्क): पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध का सीधा असर अब जालंधर के व्यापारिक गलियारों में दिखने लगा है। युद्ध के कारण वैश्विक शिपमेंट बाधित होने और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से बासमती चावल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्थानीय मंडी फेंटनगंज में दालों की कीमतों में 10 रुपए प्रति किलो तक का उछाल आया है, जिससे बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। हालांकि, अलग-अलग व्यापारियों की राय बंटी हुई है, लेकिन ट्रांसपोर्टेशन और लेबर की कमी ने इंडस्ट्री की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
युद्ध का व्यापार पर सीधा प्रहार
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारतीय बासमती चावल व्यापार को बड़ा झटका दिया है। युद्ध की वजह से समुद्री रास्तों में बाधा आ रही है, जिसके चलते विदेश जाने वाला माल बंदरगाहों पर ही फंसा हुआ है। जालंधर की प्रसिद्ध मंडी फेंटनगंज के व्यापारी दविंदर बहल ने बताया कि शिपमेंट बाधित होने से माल ढुलाई की लागत में भारी वृद्धि हुई है। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध का सीधा असर अब जालंधर के व्यापारिक गलियारों में दिखने लगा है। युद्ध के कारण वैश्विक शिपमेंट बाधित होने और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से बासमती चावल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्थानीय मंडी फेंटनगंज में दालों की कीमतों में 10 रुपए प्रति किलो तक का उछाल आया है, जिससे बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। हालांकि, अलग-अलग व्यापारियों की राय बंटी हुई है, लेकिन ट्रांसपोर्टेशन और लेबर की कमी ने इंडस्ट्री की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
युद्ध का व्यापार पर सीधा प्रहार
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारतीय बासमती चावल व्यापार को बड़ा झटका दिया है। युद्ध की वजह से समुद्री रास्तों में बाधा आ रही है, जिसके चलते विदेश जाने वाला माल बंदरगाहों पर ही फंसा हुआ है। जालंधर की प्रसिद्ध मंडी फेंटनगंज के व्यापारी दविंदर बहल ने बताया कि शिपमेंट बाधित होने से माल ढुलाई की लागत में भारी वृद्धि हुई है।


