रोजाना मेल (न्यूज डेस्क): पारस एनक्लेव में बच्ची की हत्या के मामले में जैसे जैसे राजनीतिक, पब्लिक और महिला आयोग का पुलिस का दबाव बढ़ता रहा वैसे वैसे सारा दबाव मात्र एक मुलाजिम पर डलता रहा। वीरवार सुबह खबर आई कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले एएसआई मंगत राम को नौकरी से निकाल दिया है, मतलब उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।
एएसआई पर ऐसा एक्शन लेकर बिल्कुल सही है लेकिन सिर्फ मंगत राम ही क्यूं? देश भर की अदालतें पोस्को एक्ट से लेकर नाबालिग बच्चों के हर केस में बेहद गंभीर है तो पुलिस क्यों नहीं। अब सवाल यह उठ रहा है कि पूर्व एएसआई मंगत राम को अगर बच्ची के लापता होने की सूचना मिली तो उसने एसएचओ के ध्यान में मामले को लाया था? अगर लाया था तो एसएचओ इतने घंटे कहां थे। अगर नहीं लाया गया तो यहां पर भी एसएचओ पर सवाल नहीं उठाया गया कि उनकी मॉनिटरिंग कितनी कमजोर होगी जिन्होंने अपने थाने के मुलाजिमों को गंभीर मामलों की जानकारी उन्हें देने का कभी कहा ही नहीं। सिर्फ एएसआई पर ही सभी प्रकार की कारवाई करके ही कमिश्नरेट पुलिस अपना पल्ला झाड़ेगी या फिर एसएचओ पर भी सख्त एक्शन लिया जाएगा। उधर कमिश्नरेट पुलिस ने इस मामले में सोशल मीडिया पर की गई पोस्को एक्ट की उल्लंघना करने वालों पर भी एक्शन लेना शुरू कर दिया है। इस मामले में जिन लोगों ने बच्ची की तस्वीर, उसके माता पिता की पहचान बताई उन सब के खिलाफ कानूनी कारवाई होनी तय है।


