रोजाना मेल (न्यूज डेस्क): 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
कोर्ट ने कहा कि यह बेहद गंभीर वारदात थी, जिसने समाज को झकझोर दिया। कोर्ट ने 13 जुलाई को ताहिर, नाजिम, काशिम, अनस और जावेद को हत्या, अपहरण, दंगा और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का दोषी ठहराया था। वहीं, 11 आरोपियों में से 6 को बरी कर दिया गया था।
आई ऑफिस का शव जिस पर 51 ज़ख्मों के निशान थे।
लोकल कोर्ट ने कहा –
” ताहिर हुसैन हथियारों से लैस उस भीड़ का हिस्सा थे, जो हिंदुओं के प्रति नफरत के कारण दंगा, आगजनी और लूटपाट करने के लिए इकट्ठा हुई थी। जिसने बेरहमी से और लगातार हमला करके शर्मा की हत्या कर दी।
आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा।
पुलिस ने मौत की सजा मांगी थी
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा था, ‘आरोपियों ने सारी हदें पार कर दीं। अंकित की मौत होने के बाद भी उन पर हमला जारी रखा गया। यह बेहद क्रूर और सुनियोजित हत्या थी। इसलिए दोषियों को फांसी की सजा दी जाए।
ताहिर के वकील ने कहा- रेयरेस्ट ऑफ रेयर का मामला नहीं
ताहिर हुसैन के वकील ने दलील दी थी कि हर हत्या के मामले में मौत की सजा नहीं दी जा सकती। किसी भी दोषी की अलग-अलग भूमिका साफ नहीं बताई गई। इसलिए यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में नहीं आता।
दिल्ली दंगा 23 फरवरी, 2020 से शुरू हुआ था
25 फरवरी को आईबी अफसर अंकित शर्मा घर से बाहर निकले थे, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं आए। परिवार उनकी तलाश कर रहा था, तभी लोगों ने बताया कि उनका शव चांदबाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले में देखा गया है। अगले दिन सुबह पुलिस ने नाले से अंकित का शव बरामद किया था। इसके बाद पिता रविंदर कुमार की शिकायत दयालपुर थाने में केस दर्ज किया गया था। उनका आरोप था कि अंकित की हत्या तत्कालीन AAP पार्षद ताहिर हुसैन और उनके साथियों ने की है। शिकायत के अनुसार, आरोपी ताहिर हुसैन के ऑफिस में इकट्ठा हुए थे और हत्या के बाद अंकित के शव को नाले में फेंक दिया गया।