रोजाना मेल (न्यूज डेस्क): बीजेपी बंगाल में पहली बार सरकार बनाने जा रही है। 1980 में जनसंघ ने भाजपा बनाई थी। उस वक्त श्यामा प्रसाद मुखर्जी जनसंघ के संस्थापक थे जो बंगाल के ही रहने वाले थे। 1952 में जब जनसंघ में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा तो मात्र 9 सीटे ही मिली थी। 1967 में एक और फिर 2011 तक बंगाल में भाजपा अपना खाता तक नहीं खोल पाई थी।
2016 में पहली बार बीजेपी को बंगाल में तीन सीटें मिली। 2021 में 77 सीटों तक पहुंची और अब अपने दम पर बीजेपी बंगाल में 190 सीटों तक पहुंच चुकी है और आंकड़े 200 तक पहुंचने की पूरी उम्मीद की जा सकती है। बीजेपी की जीत का रथ अभी भी विपक्षी पार्टियों को पिछड़ते हुए आगे दौड़ता जा रहा है। दिल्ली से लेकर बंगाल तक बीजेपी के ऑफिस में ढोल बजाए जा रहे हैं। कोलकाता में जीत की होली और मिठाई बांटी न रही है। कोलकाता में मामला बनर्जी के घर बाहर जय श्री राम के नारे लगाए जा रहे हैं। उधर इन आंकड़ों के बीच ममता बनर्जी का एक वीडियो सामने आया जिसमें वह अपने समर्थकों पर उकसा रही है। वीडियो वायरल होने के बाद कई इलाकों में झड़पें हुई लेकिन सशस्त्र बलों ने काबू कर लिया। वहीं ममता बनर्जी ने पोस्ट किया कि अंतिम राउंड के बाद हमारी जीत होगी।
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बंगाल की जीत के बाद इसका सीधा असर पंजाब में 2027 को होने वाले विधानसभा चुनावों में देखा जा सकता है। जो बीजेपी सरकार बंगाल में कभी नहीं जीत पाई वह अपने दम पर प्रचण्ड जीत दर्ज करवा गई तो इसका असर पंजाब की आम आदमी पार्टी पर पड़ सकता है। पार्टी में दो फाड़ हो सकता है क्योंकि इससे पहले ही आम आदमी पार्टी के सांसद पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल हो चुके है। चर्चा है कि बंगाल जीत के बाद विधायकों का रुख बीजेपी की तरफ हो सकता है लेकिन यह तुरंत प्रभाव से नहीं बल्कि बेहद करीबी समय में होगा क्योंकि कोई भी विधायक खुद पर रेड, गिरफ्तारी या फिर केस दर्ज करवाने की जगह सही समय का इंतजार करेगा। यह भी चर्चा है कि इस बार पंजाब में आरआरएस पूरी तरह से एक्टिव रहेगी ताकि बीजेपी पंजाब में भी अपने दम पर जीत निश्चित कर सके। बीजेपी का पंजाब में फोकस दोआबा बेल्ट के साथ साथ शहरी इलाकों में होगा। यह भी सच है कि पंजाब में एक दम से बीजेपी का सत्ता में आना काफी मुश्किल है।


